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40 साल बाद बनी नाली पहली बारिश में ध्वस्त, गुणवत्ताहीन निर्माण पर उठे सवाल

दर्री। जल संसाधन विभाग की दर्री सिंचाई कॉलोनी में लगभग 40 वर्षों बाद कराए गए नाली निर्माण कार्य की गुणवत्ता पहली ही बारिश में सवालों के घेरे में आ गई है। स्थानीय रहवासियों के अनुसार, करोड़ों नहीं तो लाखों रुपये की लागत से निर्मित नई नालियां पहली बारिश का दबाव भी नहीं झेल सकीं और कई स्थानों पर दरारें पड़ने के साथ-साथ क्षतिग्रस्त हो गईं।

जानकारी के अनुसार, यह निर्माण कार्य सिविल ठेकेदार माधव डहरिया द्वारा जल संसाधन विभाग के एसडीओ पी.के. टोप्पो की निगरानी में कराया गया था। कॉलोनीवासियों का आरोप है कि निर्माण के दौरान कई बार गुणवत्ता संबंधी अनियमितताओं की शिकायत की गई, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। विरोध करने पर लोगों को यह कहकर टाल दिया गया कि मामला उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पूरी आवासीय कॉलोनी में नव निर्मित नालियों में जगह-जगह दरारें दिखाई दे रही हैं, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों का यह भी आरोप है कि निर्माण स्थल पर कार्य से संबंधित कोई सूचना पटल नहीं लगाया गया, जिसके कारण निर्माण लागत, स्वीकृत राशि, कार्य अवधि और एजेंसी जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां सार्वजनिक नहीं हो सकीं।

कॉलोनीवासियों ने आरोप लगाया कि सरकारी धन से कराए जा रहे विकास कार्यों में लगातार गुणवत्ता की अनदेखी हो रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती। उन्होंने पूरे निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कोरबा जिले में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठ चुके हैं। ऐसे में पहली ही बारिश में नालियों का क्षतिग्रस्त होना संभावित लापरवाही और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।

इस संबंध में जब एसडीओ पी.के. टोप्पो से संपर्क किया गया, तो उन्होंने निर्माण कार्य में गुणवत्ता संबंधी कमी होने की बात स्वीकार की। अब क्षेत्रवासियों की निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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